Guru Jambheshwar Bishnoi: Religion with a difference

ॐ गुरु चीन्हो गुरु चीन्हो पुरोहित ।
गुरु मुख धर्म बखांणी ।।

जो गुरु होयबे सह्जे सीले शब्दे नादे ।
वेदे तिहिं गुरु का अलिंकार पिछाणी ॥

छव दर्शन जिहीं के रुपण थापण ।
संसार बर्तन निज कर थरपया ।।
सो गुरु प्रत्य्क्ष जाणी॥

जिहीं कै खर तर गौठ निरोतर बाचा।
रहिया रुद्र समाणी॥

गुरु आप संतौषी अवराँ पौषी तत्व महारस बाणी।
के के अलिया बासण हौत हुतासण तामे क्षीर दुहीजूँ ॥

रसुवन गौरस घीयन लीयूं तहां दूधन पाणी गुरु ध्याईयरे ज्ञानी।
तोडत मौहा अतिषुरसाँणी छीजत लौहा पाणी।

छल तेरी खाल पखाला।
सत गुरु तोड़े मन का साला॥

सत गुरु है तो सह्ज पछाणी कृष्ण चरित बिन काचै करवै रह्यो न रहसी पाणी॥1॥

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