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ॐ गुरु चीन्हो गुरु चीन्हो पुरोहित ।गुरु मुख धर्म बखांणी ।। जो गुरु होयबे सह्जे सीले शब्दे नादे । छव दर्शन जिहीं के रुपण थापण । जिहीं कै खर तर गौठ निरोतर बाचा। गुरु आप संतौषी अवराँ पौषी तत्व महारस बाणी। रसुवन गौरस घीयन लीयूं तहां दूधन पाणी गुरु ध्याईयरे ज्ञानी।
छल तेरी खाल पखाला। सत गुरु है तो सह्ज पछाणी कृष्ण चरित बिन काचै करवै रह्यो न रहसी पाणी॥1॥ [ Back ] [ Home Page ] |
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